धनतेरस तिथि एवं शुभ मुहूर्त
धनतेरस तिथि एवं शुभ मुहूर्त
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धनतेरस 2025 की तिथि है शनिवार, 18 अक्टूबर।
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Trayodashi तिथि प्रारंभ: 18 अक्टूबर दोपहर 12:18 बजे से।
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Trayodashi तिथि समाप्त: 19 अक्टूबर दोपहर 1:51 बजे तक।
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पूजा का प्रमुख मुहूर्त (Lakshmi / Dhanvantari पूजा) दिल्ली-क्षेत्र में: शाम 7:16 बजे से 8:20 बजे तक।
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Pradosh kaal: लगभग 5:48 बजे शाम से 8:20 बजे रात तक।
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Vrishabha kaal (कुछ विद्वानों अनुसार शुभ अवधि): लगभग 7:16 बजे से 9:11 बजे तक।
🔱 क्या है धनतेरस? महत्व और पौराणिक कथा
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“धनतेरस” का नाम संस्कृत के दो शब्दों से मिला है: “धन” (सम्पत्ति / वैभव) और “तेरस / trayodashi” (तेरहवीं तिथि)। यह कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि होती है।
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इसे धनत्रयोदशी (Dhantrayodashi) भी कहा जाता है।
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यह दिवाली-पर्व (Deepavali) की शुरुआत करती है, जहां लोग दीये जलाते हुए, घर सजाते हुए, नई चीज़ें खरीदते हुए आदि तैयारी करते हैं।
पौराणिक कथाएँ
कुछ प्रसिद्ध कथाएँ इस प्रकार हैं:
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समुद्र मंथन की कथा
कहा जाता है कि इस दिन भगवान् धन्वन्तरी (विष्णु के अवतार, स्वास्थ्य और आयु के देवता) समुद्र मंथन से उत्तरोत्तर अमृत कलश के साथ प्रकट हुए। इसलिए इस दिन उनका पूजन भी किया जाता है।
एक कथा है कि राजा हिम के पुत्र की मृत्यु का पूर्वानुमान था। उसकी पत्नी ने सोचा कि यदि दीप, धातु के गहने और बहुत सारी प्रकाश व्यवस्था हो, तो यमराज भूल जाएगा कि कौन सी पत्नी का पति कौन सा है। उन्होंने सोने, चाँदी, दीपक आदि सजाएँ और यमराज जब आया, तो प्रकाश से चकित हो गया और पहचान नहीं पाया। इसलिए पुत्र बच गया। यही कारण है कि लोग इस दिन सोना-चाँदी आदि खरीदते हैं और दीपक जलाते हैं।
🙏 पूजा-विधान एवं प्रचलित प्रथाएँ
नीचे धनतेरस पर किए जाने वाले पूजा-विधि और अन्य अनुष्ठानों का विवरण है:
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स्वच्छता एवं सजावट
घर को अच्छी तरह से साफ करें, रंगोली बनाएं, फूल और मंडप सजाएँ। -
देवताओं का पूजन
मुख्यतः मां लक्ष्मी (Goddess Lakshmi), भगवान् कुबेर (Lord Kuber), और भगवान धन्वन्तरी की पूजा की जाती है।
दीपक (दीया) जलाना अत्यंत शुभ माना जाता है — खासकर Yama Deepam नामक दीप जलाना, ताकि यमराज से बचाव हो सके। -
नवीन वस्तुओं की खरीदारी
सोना-चांदी, नए बर्तन, नए कपड़े आदि ख़रीदने की प्रथा है क्योंकि यह समृद्धि और शुभता का प्रतीक है। -
दीपक जलाना
शाम के समय घर में और बाहर प्रवेश द्वार पर दीप जलाना चाहिए। यह अँधेरे और दुर्भाग्य से रक्षा का प्रतीक है। -
दान और भेंट
जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र, चावल आदि दान देना पसंद किया जाता है। बाबा-माता को प्रसाद आदि देना लाभकारी माना जाता है।
🛑 व्रत नियम, क्या करना-क्या नहीं
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इस दिन मांस, मद्य, आलस्य, क्रोध, झूठ आदि से बचना चाहिए। पूजा के समय मन शांत और भक्ति प्रधान होना चाहिए। (सामान्य हिन्दू व्रत नियम)
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कुछ जगहों पर “उपवास” रखा जाता है या कम भोजन किया जाता है, लेकिन मुख्य ध्यान पूजन एवं शुभ कार्यों पर होता है।
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बिना आवश्यकता की सामान खरीद से बचना चाहिए — खासकर ऐसी चीजें जो केवल दिखावे के लिए हों। इरादा शुभ होना चाहिए।
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दीप, मिठाई आदि श्रद्धा से अर्पित करें।
🌟 आध्यात्मिक एवं सामाजिक महत्व
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धनतेरस समृद्धि, स्वास्थ्य और सौभाग्य की कामनाएँ लेकर आता है। यह भावना है कि नए कल की शुरुआत हो — धन, स्वास्थ्य और परिवार के लिए शांति हो।
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देवताओं की पूजा और दिव्यांशप्रकाश से अंधेरों और बुरे प्रभावों से रक्षा होती है।
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सामाजिक तौर पर यह दिन लोगों को मिलजुल कर खुशियाँ बांटने, सौहार्द बढ़ाने और सामूहिक उत्सव की भावना जगाने का अवसर होता है।